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असम चुनाव में कांग्रेस के तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों के बेटों की हार, ‘वंशवादी राजनीति’ पर बड़ा संदेश – assam election congress leaders sons defeat gaurav gogoi debabrata saikia bjp ntc agkp

असम चुनाव में कांग्रेस के तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों के बेटों


असम विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के लिए बड़ा झटका लगा है. राज्य के तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों के बेटे इस चुनाव में हार गए. इनमें से एक तो कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष और सांसद भी हैं. BJP ने इसे ‘परिवारवाद की राजनीति’ की हार बताया है.

गौरव गोगोई के पिता तरुण गोगोई असम के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहे. उन्होंने 15 साल तक कांग्रेस की सरकार चलाई. गौरव खुद भी बड़े नेता हैं. वो कांग्रेस के असम प्रदेश अध्यक्ष हैं और जोरहाट से तीन बार के सांसद हैं.

लेकिन इस विधानसभा चुनाव में गौरव गोगोई जोरहाट सीट से लड़े और BJP के बैठे हुए विधायक हितेंद्र नाथ गोस्वामी से 23,182 वोटों के फर्क से हार गए.

देबब्रत सैकिया के पिता हितेश्वर सैकिया दो बार असम के मुख्यमंत्री रहे थे. नजीरा सीट पहले उनके पिता लड़ते थे, फिर उनकी मां हेमोप्रभा सैकिया ने यहां से चुनाव जीता. देबब्रत खुद 2011 से लगातार इसी सीट से जीतते आ रहे थे और 2016 से विधानसभा में विपक्ष के नेता भी थे.

लेकिन इस बार वो BJP के मयूर बोरगोहाईं से 46,000 से ज्यादा वोटों के बड़े फर्क से हार गए. यानी जो सीट उनके परिवार की ‘घर की सीट’ मानी जाती थी, वो भी चली गई.

दिगंत बर्मन के पिता भूमिधर बर्मन एक समय असम के कार्यवाहक मुख्यमंत्री रहे थे. जब हितेश्वर सैकिया पद पर रहते हुए गुजर गए थे, तब भूमिधर बर्मन ने थोड़े समय के लिए मुख्यमंत्री का काम संभाला था. दिगंत बर्मन बारखेत्री सीट से लड़े लेकिन BJP के नारायण डेका से 84,000 से ज्यादा वोटों के बहुत बड़े फर्क से हार गए.

यह भी पढ़ें: कौन हैं BJP के हितेंद्र नाथ गोस्वामी, जिन्होंने असम के जोरहाट में गौरव गोगोई को चटाई धूल

CM हिमंता बिस्वा सरमा ने क्या कहा?

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने इन तीनों की हार पर बोलते हुए कहा कि किसी की हार में खुश होना ठीक नहीं, खासकर जब वो हितेश्वर सैकिया के बेटे हों. यहां एक दिलचस्प बात यह है कि हिमंत सरमा खुद लगभग 20 साल तक कांग्रेस में रहे और उन्हें पार्टी में लाने वाले हितेश्वर सैकिया ही थे. 2014 में वो BJP में आ गए.

लेकिन हार के बारे में उन्होंने साफ कहा कि जनता ने ‘खानदानी राजनीति’ यानी सिर्फ बाप-दादा के नाम पर चुनाव लड़ने की सोच को नकार दिया है. उन्होंने कहा कि इन लोगों ने तीन-चार बार चुनाव जीते, उनके पास अपनी अलग पहचान बनाने का पूरा मौका था, लेकिन वो ऐसा नहीं कर पाए.

एक और हार का जिक्र

CM सरमा ने सिर्फ इन तीनों की ही नहीं, बल्कि पूर्व केंद्रीय मंत्री पवन सिंह घटवार के बेटे प्रांजल घटवार की हार का भी जिक्र किया. प्रांजल चाबुआ-लाहोवाल सीट से BJP के बिनोद हजारिका से 89,000 से ज़्यादा वोटों के फर्क से हारे.

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