हंतावायरस से जिस जहाज पर हुई तीन लोगों की मौत, उस पर सवार हैं दो भारतीय क्रू मेंबर – hantavirus outbreak mv hondius dutch cruise indian crew deaths eight infected ntc bktw

हंतावायरस से जिस जहाज पर हुई तीन लोगों की मौत,


अटलांटिक महासागर में डच कंपनी की ओर से संचालित लग्जरी क्रूज ‘एमवी होंडियस’ पर हंतावायरस से संक्रमण के कारण तीन लोगों की मौत हो गई थी. दुनिया के सबसे घातक और दुर्लभ वायरस में से एक हंतावायरस से आठ लोग संक्रमित भी पाए गए हैं. इस क्रूज पर कुल 149 लोग सवार हैं, जिनमें क्रू के सदस्य भी शामिल हैं. इंडिया टुडे ने इस क्रूज का संचालन करने वाली कंपनी से यात्रियों और क्रू की विस्तृत जानकारी मांगी थी. इससे खुलासा हुआ है कि क्रूज पर तीन भारतीय क्रू मेंबर भी सवार हैं.

एमवी होंडियस का संचालन करने वाली डच पोलर ट्रैवल कंपनी ओशनवाइड एक्सपेडिशंस ने इंडिया टुडे के साथ यात्रियों और क्रू की जानकारी साझा की. कंपनी की ओर से 4 मई को मिली जानकारी के मुताबिक इस क्रूज पर कुल 23 देशों के नागरिक सवार हैं. यात्रियों में अधिकतर ब्रिटेन, अमेरिका, जर्मनी और स्पेन के पर्यटक बताए जा रहे हैं. क्रू की बात करें, तो इस सूची में अधिकतर फिलीपींस, यूक्रेन, नीदरलैंड और पोलैंड के नागरिकों के नाम हैं. इन देशों से आने वाले क्रू सदस्यों की लिस्ट के बीच दो नाम ऐसे थे, जिन्होंने इस कहानी को भारत से जोड़ दिया.

डच कंपनी के मुताबिक इस क्रूज पर कुल 61 क्रू मेंबर सवार हैं, जिनमें सबसे ज्यादा 38 क्रू मेंबर फिलीपींस के हैं. यूक्रेन और नीदरलैंड के पांच-पांच, भारत के दो क्रू सदस्य हैं. ये भारतीय क्रू सदस्य उन हजारों कर्मचारियों में शामिल हैं, जो इस तरह के क्रूज और शिप का संचालन करते हैं. क्रू सदस्यों में से दो भारत से नाता रखते हैं. इनकी राष्ट्रीयता की पुष्टि भी हो गई है, लेकिन उनकी स्थिति के संबंध में कोई जानकारी डच कंपनी की ओर से नहीं दी गई है.

डच कंपनी ओशनवाइड एक्सपेडिशंस ने कहा है कि केवल सत्यापित जानकारी ही साझा करेंगे. कंपनी ने भारतीय क्रू सदस्यों को लेकर कोई अतिरिक्त जानकारी साझा करने से इनकार कर दिया. कंपनी की ओर से यह जानकारी भी नहीं दी गई कि क्रूज पर सवार भारतीय क्रू की भूमिका क्या थी, उनका स्वास्थ्य कैसा है और क्या वे संक्रमित यात्रियों के संपर्क में आए थे.

गौरतलब है कि इस क्रूज पर फैले हंतावायरस का एंडीज स्ट्रेन इंसानों के बीच फैल सकता है, लेकिन यह वायरस हवा के जरिए नहीं फैलता और ना ही पास उठने-बैठने से ही. यह वायरस केवल बहुत करीबी संपर्क से फैलता है, जैसे पति-पत्नी, केबिन साथी या बिना सुरक्षा के इलाज करने वाले डॉक्टर के बीच. डच कंपनी का यह क्रूज एक अप्रैल को अर्जेंटीना के दक्षिणी छोर से रवाना हुआ था.

इस क्रूज पर सवार यात्री उशुआइया में एक बर्ड वाचिंग टूर पर गए थे. अर्जेंटीनी जांच दल का मानना है कि यही टूर इस संक्रमण का स्रोत हो सकता है. उशुआइया दुनिया का सबसे दक्षिणी शहर माना जाता है. ऐसा माना जा रहा है कि इस टूर में शामिल एक डच दंपति के जरिये यह वायरस क्रूज पर पहुंचा. इस दंपति को तब कोई परेशानी महसूस नहीं हुई थी. वे जहाज पर सवार हो गए और उन्हें इस बात का बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि वह दुनिया के सबसे दुर्लभ और घातक वायरस में से एक लेकर जा रहे हैं.

मौतों की शुरुआत

इस क्रूज पर 11 अप्रैल को एक यात्री की मौत हो गई. क्रूज पर हुई इस मौत का कारण तब पता नहीं चल सका था. 24 अप्रैल को उसका शव सेंट हेलेना में उतारा गया, जहां उसकी पत्नी शव के साथ गईं. 27 अप्रैल को ओशनवाइड एक्सपेडिशंस को जानकारी मिली कि वापसी यात्रा के दौरान पत्नी की तबीयत बिगड़ गई थी और बाद में उनकी भी मौत हो गई. दोनों डच नागरिक थे.

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27 अप्रैल को एक अन्य यात्री गंभीर रूप से बीमार हो गया और उसे चिकित्सकीय सहायता के लिए दक्षिण अफ्रीका ले जाया गया. यह व्यक्ति फिलहाल जोहान्सबर्ग के एक अस्पताल के आईसीयू में भर्ती है और उसकी हालत गंभीर लेकिन स्थिर बताई जा रही है. इस मरीज में हंतावायरस का एक वैरिएंट पाया गया है.

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क्रूज पर सवार यात्रियों की मौत का मामला यहीं नहीं थमा. 2 मई को एक जर्मन यात्री की भी जहाज पर ही मौत हो गई. तब तक विश्व स्वास्थ्य संगठन को अलर्ट भेजा जा चुका था और जहाज को केप वर्डे में रुकने का आदेश भी दे दिया गया. फिलहाल, यह जहाज केप वर्डे से रवाना हो चुका है और स्पेन के कैनरी द्वीप स्थित टेनेरिफ की ओर बढ़ रहा है.

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इस क्रूज पर सवार तीन गंभीर मरीजों को एयर एंबुलेंस के जरिए निकाला गया है. बाकी यात्री 11 मई को जहाज से उतरेंगे. यूरोप की स्वास्थ्य एजेंसियां उन 80 से अधिक यात्रियों का पता लगाने में जुटी हैं, जिन्होंने संक्रमित महिला के साथ सफर किया था जब बीमारी की पुष्टि भी नहीं हुई थी.

भारत के लिए हंतावायरस कितना रिस्क

भारत हंतावायरस से पूरी तरह अनजान नहीं है. साल 2008 में तमिलनाडु में किए गए एक अध्ययन में गोदाम कर्मचारियों, किसानों और आदिवासी के साथ ही चूहा पकड़ने वालों में 28 मामलों की पुष्टि हुई थी. 2021 में एक खदान मजदूर भी हंतावायरस से संक्रमित पाया गया था. भारत के लिए असली चिंता किसी जहाज पर फैला संक्रमण नहीं, बल्कि कम पहचान होना है.

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डॉक्टर कई बार हंतावायरस को डेंगू या लेप्टोस्पायरोसिस समझ लेते हैं. यह प्रकोप याद दिलाता है कि दुनिया के सबसे खतरनाक रोगजनकों को पासपोर्ट की जरूरत नहीं होती. वे हमारे साथ यात्रा करते हैं- धूल के एक कण में, जंगल की पगडंडी पर या अटलांटिक पार करते किसी जहाज पर.

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