बंगाल में ‘ममता मॉडल’ पर भारी पड़ी BJP की मेहनत… सिंगूर से नंदीग्राम तक ऐसे बदला हवा का रुख – west bengal election analysis bjp rise voter anger nandigram singur political shift mamata vs suvendu ntc agkp

बंगाल में


पश्चिम बंगाल में एक बड़ा बदलाव आया है. BJP ने 204 सीटें जीतकर इतिहास रच दिया. यह वही BJP है जिसके पास 2016 में सिर्फ 3 सीटें थीं. यह जीत अचानक नहीं आई. इसके पीछे है 15 साल की जनता की थकान, गुस्सा और धीरे-धीरे जमा होता असंतोष. पत्रकार मारिया शकील ने पूरे बंगाल का दौरा किया और जो देखा, वो बताता है कि यह बदलाव कैसे आया.

इस चुनाव में 92.47 फीसदी वोटिंग हुई, जो बंगाल के इतिहास में सबसे ज्यादा है. इसका मतलब यह नहीं कि लोग सिर्फ वोट देने गए. इसका मतलब है कि लोग फैसला सुनाने गए. जो लोग पहले घर बैठ जाते थे, वो भी इस बार निकले.

नंदीग्राम में क्या देखा?

नंदीग्राम वही जगह है जहां से ममता बनर्जी ने अपनी राजनीतिक ताकत बनाई थी. यहीं से उन्होंने जमीन आंदोलन लड़ा था और बड़ी नेता बनी थीं.

लेकिन जब मारिया वहां गई तो मछली पालने वाले मालिकों ने बताया कि 10 साल से बिजली नहीं आई. डीजल से पंप चलाने पड़ते हैं. सरकार से कोई मदद नहीं मिली. सड़क नहीं, पानी नहीं.
जो परिवार कभी ममता के आंदोलन में थे, उन्होंने कहा कि सरकार ने कोई नौकरी नहीं दी. एक महिला ने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा के मामले में एक कदम भी आगे नहीं बढ़े. यानी जिन लोगों ने ममता को ऊपर पहुंचाया, वही अब उनके खिलाफ हो गए.

सिंगूर में क्या मांगा लोगों ने?

सिंगूर वो जगह है जहां ममता ने टाटा की कार फैक्ट्री रुकवा दी थी. उस समय लोगों ने उनका साथ दिया था. लेकिन अब वही लोग कह रहे हैं कि हमें 1500 रुपये की स्कीम नहीं चाहिए. हमें काम चाहिए, फैक्ट्री चाहिए. ममता के राज में कोई फैक्ट्री नहीं आई. बंगाल छोड़कर बाहर जाना पड़ता है नौकरी के लिए. अगर BJP आएगी तो शायद फैक्ट्रियां लगेंगी और बंगाल में ही काम मिलेगा.

RG Kar मेडिकल कॉलेज का मामला

कोलकाता के RG Kar मेडिकल कॉलेज में एक महिला डॉक्टर के साथ रेप और हत्या हुई. यह मामला पूरे बंगाल में आग की तरह फैल गया. शहरी इलाकों में जो महिलाएं पहले TMC को वोट देती थीं, वो इस घटना के बाद टूट गईं.

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बालीगंज के घरों में महिलाओं ने कहा कि ममता के राज में कानून-व्यवस्था बिल्कुल खराब हो गई है. महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं. यह हम स्वीकार नहीं करेंगी. इसी भावना का नतीजा यह रहा कि उस पीड़िता की मां को BJP ने पनीहाटी सीट से उम्मीदवार बनाया और वो जीत गईं.

कोलकाता के एक पेंटर की बात

एक साधारण पेंटर ने बड़ी सीधी बात कही जो पूरे मामले को समेट देती है. उसने कहा कि हमें ऐसा नेता चाहिए जो सिर्फ अपने फायदे के बारे में न सोचे. हमें ऐसे उम्मीदवार चाहिए जिन पर कोई आपराधिक मामला न हो.

उत्तर बंगाल, जूट मिल और मतुआ समुदाय

नॉर्थ 24 परगना में लोगों ने एक ही बात कही कि दीदी ने नौकरी नहीं दी, कुछ नहीं बदला. जूट मिल के मजदूरों का उद्योग बंद हो रहा है. वो चाहते हैं कि मिलें दोबारा खुलें. उन्हें लगता है कि BJP आई तो महंगाई कम होगी.

मतुआ समुदाय के लोगों के लिए CAA यानी नागरिकता कानून बहुत बड़ा मुद्दा था. BJP ने उन्हें CAA दिया, उनकी पहचान दी, नागरिकता का भरोसा दिया. उनके लिए यही सब कुछ था.

BJP की 15 साल की मेहनत

2016 में BJP के पास सिर्फ 3 सीटें थीं. 2021 में 77 हो गईं. और 2026 में 204. यह कोई चमत्कार नहीं था. BJP ने हर शिकायत को नोट किया. मछली पालने वाले की बिजली की दिक्कत हो, या शहरी महिला का डर. सबको जोड़कर एक आंदोलन बनाया. धीरे-धीरे, सब्र के साथ.

बंगाली में एक कहावत है कि जीत धीरे-धीरे आती है. BJP ने यही किया. और 15 साल के इंतज़ार के बाद जनता ने भी एक साथ उठकर पुराना किला गिरा दिया.

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