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बंगाल में चुनाव बाद की हिंसा में कोई ‘परिवर्तन’ नहीं… आईं हत्या, हिंसा की खबरें – west bengal post poll violence bjp victory tmc allegations lclar

बंगाल में चुनाव बाद की हिंसा में कोई


पश्चिम बंगाल में चुनाव नतीजों के बाद एक बार फिर हिंसा की खबरें सामने आई हैं. परिवर्तन के नारे के बीच राज्य के कई इलाकों से हत्या, आगजनी और तोड़फोड़ के आरोप सामने आए हैं. टीएमसी ने दावा किया है कि उनके कार्यकर्ताओं और दफ्तरों को निशाना बनाया गया, जबकि बीजेपी ने इन आरोपों को खारिज किया है. चुनाव परिणाम आने के साथ ही सोमवार से कई जगहों पर झड़पों की खबरें आने लगीं. तृणमूल कांग्रेस ने दावा किया कि बीरभूम के नानूर में उनके एक कार्यकर्ता की हत्या कर दी गई. वहीं पुलिस के अनुसार कोलकाता के टॉलीगंज और कस्बा समेत बारुईपुर, कमरहाटी, बारानगर, हावड़ा और बहारामपुर जैसे इलाकों में तृणमूल कांग्रेस के दफ्तरों में तोड़फोड़ की घटनाएं हुईं.

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में भीड़ को लाठी और डंडों के साथ लोगों का पीछा करते हुए देखा गया. तृणमूल कांग्रेस का आरोप है कि उनके समर्थकों को निशाना बनाया गया और कई जगहों पर मारपीट की घटनाएं हुईं. पार्टी ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ लोग दुकानदारों को धमका रहे थे और उन्हें दुकानें बंद करने के लिए मजबूर कर रहे थे. इन घटनाओं के बीच ममता बनर्जी  ने 10 सदस्यीय फैक्ट फाइंडिंग कमेटी बनाकर मामले की जांच के आदेश दिए हैं. तृणमूल कांग्रेस ने इन घटनाओं को मध्यकालीन बर्बरता बताया और कहा कि यह बदलाव नहीं बल्कि डर का माहौल है.

TMC का आरोप, कार्यकर्ताओं और दफ्तरों को बनाया गया निशाना

वहीं बीजेपी की तरफ से अलग रुख सामने आया है. पार्टी के नेताओं ने तृणमूल कांग्रेस के आरोपों को खारिज किया है. भाजपा नेता राहुल सिन्हा ने कहा कि यह घटनाएं तृणमूल कांग्रेस के अंदरूनी गुटों के बीच संघर्ष का नतीजा हो सकती हैं. उन्होंने कहा कि चुनाव नतीजों के बाद पार्टी के अंदर नाराजगी सामने आ रही है. भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने प्रशासन से अपील की है कि वह हिंसा के दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे, चाहे वे किसी भी दल से जुड़े हों. राजनीतिक हिंसा पश्चिम बंगाल की राजनीति का पुराना हिस्सा रही है. पहले वाम शासन के दौरान और बाद में तृणमूल कांग्रेस के शासन में भी चुनाव के दौरान हिंसा की घटनाएं सामने आती रही हैं. पिछले चुनावों के आंकड़े भी इस स्थिति को दिखाते हैं.

2024 के लोकसभा चुनाव में राज्य में कम से कम छह लोगों की मौत हुई थी. साल 2021 के विधानसभा चुनाव के दौरान करीब 17 लोगों की जान गई थी. 2018 के पंचायत चुनाव में 75 लोगों की मौत हुई थी, जो सबसे हिंसक चुनावों में से एक था. 2016 के विधानसभा चुनाव में भी लगभग आठ लोगों की मौत हुई थी. हालांकि चुनाव आयोग का कहना है कि इस बार चुनाव प्रक्रिया काफी हद तक शांतिपूर्ण रही. आयोग के मुताबिक मतदान के दौरान कोई बड़ी हिंसा या मौत की घटना नहीं हुई. चुनाव के दौरान कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी आयोग के पास होती है और केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती भी की जाती है.

जानकारी के अनुसार, राज्य में करीब 700 कंपनियां यानी 70 हजार केंद्रीय सुरक्षा बल के जवान तैनात किए गए थे. इसके बावजूद नतीजों के बाद हिंसा की घटनाएं सामने आ रही हैं, जिससे कानून व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी जीत के बाद कार्यकर्ताओं से बदले की राजनीति से दूर रहने की अपील की थी. उन्होंने कहा था कि ध्यान बदले पर नहीं बल्कि बदलाव और विकास पर होना चाहिए. उन्होंने लोगों से अपील की थी कि वे यह न देखें कि किसने किसे वोट दिया, बल्कि राज्य के विकास के लिए मिलकर काम करें.

ममता बनर्जी ने जांच के लिए फैक्ट फाइंडिंग कमेटी बनाई

इसके बावजूद जमीनी हालात में तनाव और हिंसा की खबरें सामने आ रही हैं. यह स्थिति दिखाती है कि राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के बीच राज्य में शांति बनाए रखना अभी भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है. फिलहाल प्रशासन हालात पर नजर बनाए हुए है और विभिन्न इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है. आने वाले दिनों में जांच और कार्रवाई के बाद ही साफ हो पाएगा कि इन घटनाओं के पीछे कौन जिम्मेदार है.
 

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