उस ‘सिकंदर’ की विदाई, जिसने T20 को बदल दिया – suryakumar yadav t20 captaincy era ends shreyas iyer new captain mdsb ntc

उस ‘सिकंदर’ की विदाई, जिसने t20 को बदल दिया


क्रिकेट के रंगमंच पर कुछ किरदार ऐसे आते हैं, जो सिर्फ रिकॉर्ड्स की किताबों में दर्ज नहीं होते, बल्कि खेल के व्याकरण को ही बदल देते हैं. सूर्य कुमार यादव उर्फ ‘SKY’ एक ऐसे ही चक्रवात थे. जिस तरह हर चमकीले दिन के बाद एक गरिमामयी शाम आती है, उसी तरह भारतीय टी-20 क्रिकेट के आकाश से इस ‘सूर्य’ का अस्त हो गया है. 

श्रेयस अय्यर अब नए कप्तान के रूप में कमान संभालेंगे, लेकिन सूर्या ने जहां टीम को छोड़ा है, वह शिखर इतना ऊंचा है कि वहां से केवल अनंत आसमान दिखता है.

ज्यादातर कप्तानों की विदाई आंसुओं, हार के मलबे और टूटे हुए सपनों के बीच होती है. लेकिन सूर्या का जाना अलग है. वह उस वक्त हटाए गए हैं, जब टीम इंडिया टी-20 क्रिकेट के एवरेस्ट पर खड़ी है. वह एक सच्चे सेवक की तरह आए, उन्होंने खेला, दुनिया को अपनी मुट्ठी में किया, वर्ल्ड कप जिताया और मुस्कुराते हुए विदा हो गए.

अहमदाबाद में उगा सूरज, वहीं डूबा!

सूर्या के करियर की पटकथा किसी मुकम्मल सिनेमा जैसी है. जिस अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम से कभी उनके टी-20 इंटरनेशनल करियर का आगाज हुआ था, नियति ने विदाई के लिए भी उसी मैदान को चुना. हाथ में चमचमाती हुई टी-20 वर्ल्ड कप की ट्रॉफी, जिसे चूमते हुए और अहमदाबाद की पिच की मिट्टी को अपने माथे से लगाते हुए सूर्या की तस्वीरें सुनहरे अतीत का हिस्सा बन गई हैं. बैक-टू-बैक वर्ल्ड कप टाइटल डिफेंड करने का जो ख्वाब भारतीय फैंस ने देखा था, उसे सूर्या ने अपनी कप्तानी में हकीकत में बदला.

कप्तानी से पहले भी सूर्या ने भारत को विश्वविजेता बनाने में हरसंभव योगदान दिया. 2024 के टी20 वर्ल्ड कप फाइनल में लॉन्ग-ऑन सीमा पर डेविड मिलर का वो असंभव सा कैच, सिर्फ एक कैच नहीं था. वह फाइनल मुक़ाबले का अहम टर्निंग पॉइंट था. रोहित शर्मा के संन्यास के बाद जब कप्तानी का ताज सूर्या के सिर सजा, तो किसी ने नहीं सोचा था कि वो इस दबाव को एक उत्सव में बदल देंगे.

निर्भीकता का नया युग

एक कप्तान के तौर पर सूर्या का एनालिसिस किया जाए, तो उनका सबसे बड़ा योगदान था- ‘थॉट प्रोसेस’ में क्रांति. उन्होंने ड्रेसिंग रूम से हार का डर और संकोच पूरी तरह से बाहर निकाल फेंका. सूर्या की कप्तानी में भारतीय बल्लेबाजों को वो पंख मिले जिसकी कल्पना पहले नहीं की गई थी.

  • असंभव को सामान्य बनाना: उनकी कप्तानी में टीम इंडिया ने 240-250 के स्कोर को एक सामान्य टोटल बना दिया. विरोधी टीमें जहां इस स्कोर के नीचे दब जाती थीं, वहीं भारतीय टीम के लिए 300 का आंकड़ा भी अब पहुंच में लगने लगा था.
  • गेंदबाजों का संबल: उन्होंने युवा गेंदबाजों को वो आजादी और भरोसा दिया, जो एक लीडर की असली पहचान होती है. गलतियों पर डांटने के बजाय उन्होंने गेंदबाजों की पीठ थपथपाई.
  • अजेय रथ: सूर्या की कप्तानी में भारत की किसी बाइलेटरल सीरीज में हार नहीं हुई. 80 फीसदी से ज्यादा का जीत प्रतिशत इस बात का गवाह है कि उनका दौर टी-20 क्रिकेट में भारत का स्वर्ण काल था.

हुनर की कीमत और कप्तानी का बोझ

मगर आंकड़ों के लिहाज से एक कड़वा सच यह भी है कि कप्तानी के इस सुनहरे सफर ने सूर्या के निजी प्रदर्शन पर असर डाला.  जब वह सिर्फ एक बल्लेबाज थे, तो आईसीसी रैंकिंग के नंबर वन सिंहासन पर उनका एकछत्र राज था. वह मैदान के चारों तरफ 360 डिग्री पर ऐसे शॉट्स खेलते थे जो किसी वीडियो गेम जैसे लगते थे. लेकिन जब कंधों पर कप्तानी की जिम्मेदारी आई, तो उनके बल्ले की वो कशिश भी फ़ीकी पड़ती गई. बढ़ती उम्र (35 पार) और निजी फॉर्म में आए गिरावट ने अंततः चयनकर्ताओं को भविष्य की ओर देखने पर मजबूर किया. लेकिन यह सूर्या की महानता ही है कि उन्होंने इस बदलाव को बेहद सहजता से स्वीकार किया.

वो आया, उसने देखा, उसने जीता!

लैटिन भाषा की एक मशहूर कहावत है: ‘Veni, Vidi, Vici’ (वह आया, उसने देखा, उसने फतह किया). सूर्य कुमार यादव का टी-20 करियर इसी कहावत का साक्षात प्रतिबिंब है. वह इंटरनेशनल क्रिकेट में देर से आए, लेकिन जब आए तो छा गए. उन्होंने पारंपरिक क्रिकेट के रूढ़िवादी ढर्रे को तोड़ा और यह दिखाया कि बैटिंग केवल कलाई का खेल नहीं, बल्कि रचनात्मकता की उड़ान भी है.

श्रेयस अय्यर को विरासत में एक ऐसी टीम मिली है जो जीतना जानती है, जो बेखौफ है और जिसके पास एक चैंपियन माइंडसेट है. सूर्या भले ही अब नीली जर्सी में च्युइंग गम चबाते मैदान पर विरोधी गेंदबाजों की धज्जियां उड़ाते न दिखें, लेकिन जब-जब टी-20 क्रिकेट की बात होगी ‘Mr 360’ का नाम अदब और गौरव से लिया जाएगा. SKY का यह सूर्यास्त भी किसी भोर से कम खूबसूरत नहीं है.

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