Headlines

थाने में खड़े थे जब्त ट्रक, धीरे-धीरे पार कर दी गई डेढ़ करोड़ की LPG, फूड ऑफिसर निकला खेल का मास्टरमाइंड – mahasamund lpg scam food officer mastermind rs 1 crore 50 lakh gas diversion lcla

थाने में खड़े थे जब्त ट्रक, धीरे धीरे पार कर दी


छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में सामने आया LPG घोटाला चौंका देने वाला है. LPG से भरे छह जब्त ट्रक थाने में खड़े थे. गर्मी बढ़ रही थी और पुलिस को डर था कि कहीं कोई बड़ा हादसा न हो जाए. शिफ्टिंग के बाद इन ट्रकों से करीब डेढ़ करोड़ रुपये की LPG निकालकर बाजार में बेच दी गई. इस पूरे खेल में फर्जी दस्तावेज, नकली वजन पर्चियां और सरकारी रिकॉर्ड तक का इस्तेमाल किया गया. फूड ऑफिसर इस पूरे खेल का मास्टरमाइंड निकला, जिसे इस पूरी डील में 50 लाख रुपये मिले. पुलिस ने जिला खाद्य अधिकारी अजय यादव समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया है.

एजेंसी के अनुसार, पूरी कहानी दिसंबर 2025 से शुरू होती है. महासमुंद जिले के सिंहोड़ा थाना इलाके में पुलिस ने छह LPG कैप्सूल ट्रकों को पकड़ा था. आरोप था कि इन ट्रकों से अवैध तरीके से गैस सिलेंडरों की रिफिलिंग की जा रही थी. कार्रवाई के बाद ट्रकों को थाने में खड़ा कर दिया गया. इन कैप्सूल ट्रकों में बड़ी मात्रा में LPG भरी हुई थी.

समय बीतता गया और मार्च आते-आते गर्मी तेज हो गई. थाने में इतने बड़े पैमाने पर ज्वलनशील गैस से भरे ट्रकों को रखना जोखिम भरा माना गया. पुलिस ने सुरक्षा कारणों से जिला प्रशासन को पत्र लिखकर ट्रकों को किसी सेफ जगह शिफ्ट करने की मांग की. यहीं से पूरे खेल की असली शुरुआत हुई.

यह भी पढ़ें: UP: लाइन में जनता, गोदाम में खेल… SDM के छापे ने खोल दी गैस कालाबाजारी की पोल, 395 सिलेंडरों की हुई हेराफेरी

पुलिस जांच के मुताबिक, 23 मार्च को जिला खाद्य अधिकारी अजय यादव और गौरव गैस एजेंसी संचालक पंकज चंद्राकर की मुलाकात हुई. इसी बैठक में गैस चोरी की साजिश रची गई. दोनों ने अनुमान लगाया कि ट्रकों में मौजूद गैस बेचकर बड़ा मुनाफा हो सकता है. इसके बाद काम बांटे गए. पंकज चंद्राकर को खरीदार तलाशने और पूरी डील सेट करने की जिम्मेदारी मिली, जबकि मनीष चौधरी को रायपुर की गैस एजेंसियों से संपर्क साधने का काम दिया गया.

26 मार्च को अजय यादव और पंकज चंद्राकर खुद सिंहोड़ा थाने पहुंचे. वहां उन्होंने ट्रकों में मौजूद LPG का आकलन किया. जांच में सामने आया कि ट्रकों में करीब 105 मीट्रिक टन गैस भरी हुई थी. उसी रात आरोपियों ने एक गैस कारोबारी के साथ मीटिंग की और पूरी डील करीब 80 लाख रुपये में फाइनल हो गई.

पुलिस के मुताबिक, रायपुर के ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स के मालिक संतोष ठाकुर ने यह डील की. सबसे बड़ा हिस्सा जिला खाद्य अधिकारी अजय यादव को मिला. आरोप है कि ट्रकों की कस्टडी सौंपे जाने के अगले ही दिन, यानी 31 मार्च को अजय यादव को 50 लाख रुपये दे दिए गए.

बाकी 30 लाख रुपये को लेकर आरोपियों के बीच भरोसे की कमी सामने आई. पुलिस जांच में पता चला कि सिक्योरिटी के तौर पर 30 लाख रुपये डिजिटल ट्रांसफर के जरिए मनीष चौधरी के खाते में डाले गए. बाद में यह रकम वापस लौटा दी गई. इस बीच मनीष चौधरी ने 10 लाख रुपये अपने हिस्से के तौर पर रख लिए, जबकि 20 लाख रुपये पंकज चंद्राकर को दिए गए.

ट्रकों से धीरे-धीरे निकाल ली करीब 92 मीट्रिक टन LPG

30 मार्च को फूड डिपार्टमेंट के अधिकारियों ने आधिकारिक तौर पर छह LPG ट्रकों की जिम्मेदारी ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स को सौंप दी. इसके बाद ट्रकों को सिंहोड़ा थाने से रायपुर जिले के अभनपुर इलाके में स्थित पेट्रोकेमिकल्स प्लांट ले जाया गया.

पुलिस के अनुसार, अगले करीब एक हफ्ते तक ट्रकों से धीरे-धीरे LPG निकाली जाती रही. गैस को बाजार में बेचा गया और पूरा काम प्लानिंग से हुआ, ताकि किसी को शक न हो. जांच में पता चला कि करीब 92 मीट्रिक टन LPG ट्रकों से गायब कर दी गई, जिसकी कीमत लगभग डेढ़ करोड़ रुपये थी.

आरोपियों ने पूरे मामले को दबाने के लिए सरकारी रिकॉर्ड तक से छेड़छाड़ कर दी. फर्जी वजन पर्चियां तैयार की गईं. नकली दस्तावेज बनाए गए. यहां तक कि असली वजन प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही फर्जी रिकॉर्ड कलेक्टर ऑफिस में जमा कर दिए गए. इसी रिकॉर्ड से बाद में पूरी कहानी सामने आई.

जांच आगे बढ़ी तो परत-दर-परत पूरा खेल सामने आता गया. पुलिस ने एक्शन लेते हुए फूड ऑफिसर अजय यादव, पंकज चंद्राकर, मनीष चौधरी और निखिल वैष्णव को अरेस्ट कर लिया. वहीं ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स के मालिक संतोष ठाकुर और सार्थक ठाकुर फिलहाल फरार हैं. उनकी तलाश जारी है.

महासमुंद के एसपी प्रभात कुमार का कहना है कि मामले की जांच जारी है. आने वाले दिनों में और भी खुलासे हो सकते हैं. पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि इस पूरे नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल थे.

—- समाप्त —-



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *