‘सुबह हमारा CM शपथ लेगा शाम को चाहिए एनकाउंटर…’ चंद्रनाथ की हत्या पर दोस्त कासिम अली की डिमांड – Our new CM will sworn in morning we want Chandranath rath killer killed in encounter Qasim Ali said lclg

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पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के मध्यमग्राम में बीजेपी नेता शुभेंदु अधिकारी के सहयोगी चंद्रनाथ रथ की हत्या के बाद लोगों में गम और गुस्सा दोनों है. हर तरफ आक्रोश है.चंद्रनाथ ने दोस्त कासिम अली की आंखों से आंसू रुकने का नाम ही नहीं ले रही. उनके चेहरे पर गुस्सा, आवाज में दर्द और आंखों में बेचैनी भी दिखाई देती है. आक्रामक अंदाज में वे कहते हैं 9 तारीख को सुबह हमारा मुख्यमंत्री शपथ लेगा और शाम तक हमें एनकाउंटर चाहिए.

चलो मिलते हैं, चाय पीते हैं…

कासिम अली के मुताबिक, बुधवार शाम करीब 6 से 6:30 बजे उनकी चंद्रनाथ रथ से आखिरी बातचीत हुई थी. उन्होंने बताया, चंद्रनाथ ने फोन करके कहा था कि आ जाओ, निजाम पैलेस में बैठते हैं. गप्प मारेंगे, चाय पिएंगे. बीजेपी की जीत को लेकर जश्न मनाएंगे. हमने कहा आज नहीं आ पाएंगे, कल मिलेंगे. वही हमारी आखिरी बात थी.  लेकिन जिस जश्न की तैयारी हो रही थी, उससे पहले ही रात गोलियों की आवाज ने सबकुछ खत्म कर दिया.

मध्यमग्राम में गोलियों की तड़तड़ाहट

बुधवार देर रात मध्यमग्राम की सड़कें अचानक गोलियों की आवाज से गूंज उठीं. पुलिस सूत्रों के मुताबिक, चंद्रनाथ रथ अपनी कार से जा रहे थे, तभी कुछ हमलावरों ने उनका पीछा करना शुरू किया. बताया जा रहा है कि एक कार और कई बाइक लगातार उनकी गाड़ी के पीछे थीं. कुछ दूरी पर कार ने चंद्रनाथ की गाड़ी को ओवरटेक कर रोका और फिर बाइक सवार हमलावरों ने बेहद करीब से ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी. चंद्रनाथ रथ को पांच गोलियां लगीं. गोली लगते ही इलाके में अफरा-तफरी मच गई. स्थानीय लोग दौड़कर मौके पर पहुंचे और उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. हत्या की खबर फैलते ही बीजेपी कार्यकर्ताओं में गुस्सा फैल गया. देर रात अस्पताल और घटनास्थल पर भारी भीड़ जुट गई.

दोस्त बोले टारगेट चंददा नहीं, शुभेंदुदा थे

हत्या के बाद कासिम अली ने रोते हुए दावा किया है कि टारगेट शुभेंदु अधिकारी थे. चंद्रनाथ उनके सबसे करीबी लोगों में थे. बहुत दिन से रेकी हो रही थी. जिन लोगों ने हमला किया, उन्हें सब पता था कि वो कहां रहते हैं, कब आते-जाते हैं. कासिम अली का आरोप है कि यह कोई सामान्य अपराध नहीं, बल्कि पूरी प्लानिंग के साथ की गई हत्या है. हालांकि पुलिस ने अभी तक इस एंगल की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन जांच एजेंसियां इस संभावना को भी खारिज नहीं कर रही हैं कि हमलावरों को मूवमेंट की पूरी जानकारी थी.

ममता बनर्जी ने हमारा चंददा छीन लिया

कासिम अली ने बातचीत के दौरान बेहद गंभीर राजनीतिक आरोप भी लगाए. उन्होंने कहा, ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी चंद्रनाथ की सफलता बर्दाश्त नहीं कर पाए. भवानीपुर चुनाव में जो काम चंद्रनाथ ने किया, उसके बाद वो टारगेट पर आ गए थे. ममता बनर्जी हार मान नहीं पा रही हैं. कासिम अली ने कहा कि बंगाल की जनता इस हत्या को कभी नहीं भूलेगी. हालांकि इन आरोपों की पुष्टि नहीं हुई है और पुलिस फिलहाल सभी पहलुओं की जांच कर रही है.

अंधाधुंध हमला नहीं था

पुलिस सूत्रों का कहना है कि शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि हमलावर बेहद स्पष्ट टारगेट लेकर आए थे. कार में ड्राइवर समेत अन्य लोग भी मौजूद थे, लेकिन हमलावरों ने सिर्फ चंद्रनाथ रथ को निशाना बनाया. बीजेपी नेताओं का दावा है कि यह सीधे तौर पर राजनीतिक संदेश देने की कोशिश है. घटनास्थल से पुलिस को कई खाली कारतूस और लाइव बुलेट मिले हैं. सीसीटीवी फुटेज भी खंगाले जा रहे हैं.

डीजीपी खुद पहुंचे मौके पर

घटना की गंभीरता को देखते हुए पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिदेशक सिद्धनाथ गुप्ता खुद मौके पर पहुंचे. उन्होंने कहा कि पुलिस सभी एंगल से जांच कर रही है और जल्द आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा. डीजीपी ने बताया कि जिस कार का इस्तेमाल वारदात में हुआ, उसे सीज कर लिया गया है. शुरुआती जांच में पता चला है कि कार की नंबर प्लेट से छेड़छाड़ की गई थी. पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि वारदात में कितने लोग शामिल थे और हमलावर कहां से आए थे.

मध्यमग्राम में बढ़ी सुरक्षा

हत्या के बाद मध्यमग्राम और आसपास के इलाकों में भारी पुलिस फोर्स तैनात कर दी गई है. संवेदनशील इलाकों में रातभर गश्त चलती रही. पुलिस को आशंका है कि घटना के बाद राजनीतिक तनाव और बढ़ सकता है. इसी वजह से अतिरिक्त सुरक्षा बलों को भी अलर्ट पर रखा गया है. चंद्रनाथ रथ की हत्या ने एक बार फिर बंगाल की राजनीति में हिंसा और राजनीतिक प्रतिशोध की बहस को तेज कर दिया है. अब सबकी नजर पुलिस जांच पर है. सवाल सिर्फ इतना नहीं कि चंद्रनाथ रथ की हत्या किसने की, बल्कि यह भी है कि क्या यह हत्या बंगाल की राजनीति में आने वाले बड़े टकराव की शुरुआत है ?

 

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