चीन का एक पूर्व सैनिक एक महीने से म्यांमार के साइबर स्कैमरों के किलेबंद अड्डे में फंसा था. आखिरकार उसने साहस कर हथियारबंद अपराधियों की निगेहबानी से खुद को छिपाते हुए दीवार फांदकर भाग निकला. पहरेदारों की नजरों से बचने के लिए पूरे शरीर पर गोबर लेप लिया था और दिन-रात लगातार कई किलोमीटर तक पैदल चलता रहा. इस चीनी पूर्व सैनिक के खतरनाक अपराधियों के चंगुल से भाग निकलने की कहानी काफी रोचक है.
साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन का एक पूर्व सैनिक म्यामांर के साइबर स्कैमरों के एक सीक्रेट अड्डे में कैद हो गया था. एक टूर के दौरान गलती से वो इन अपराधियों के चंगुल में आ फंसा था. इसके बाद उसे अपनी जिंदगी के सबसे बुरे एक महीने उस गंदगी भरे और खतरनाक माहौल में बितने पड़े. आखिरकार उसने हिम्मत जुटाकर वहां से भागने का फैसला लिया. इसके लिए उसने जो कदम उठाए वो वाकई साहसिक और आंख खोलने वाले हैं.
एक गार्ड को भी करना पड़ा था काबू
चीनी सैनिक ने बताया है कि कैसे उसने म्यांमार में धोखाधड़ी के एक अड्डे से दीवार फांदकर, अपनी गंध छिपाने के लिए शरीर में गोबर लगाकर और एक हथियारबंद गार्ड को काबू में करके भाग निकला. इस दौरान उसने अपनी ट्रेनिंग और सैन्य कौशल का बखूबी इस्तेमाल किया.
पूर्वोत्तर चीन के यांग लेई नाम के पूर्व सैनिक ने चीन में सुरक्षित वापस लौटने के बाद अपने रोमांचक पलायन की कहानी शेयर की. यांग ने बताया कि उन्होंने मार्च में थाई-म्यांमार सीमा के पास थाईलैंड में 10 लोगों के एक टूर ग्रुप की अगुआई की थी.
उन्होंने जिस स्थानीय टूर गाइड को काम पर रखा था, उसके पास वैध निवास परमिट नहीं था और उसने बॉर्डर कंट्रोल को दरकिनार करने की कोशिश की. इस वजह से उनके ग्रुप का सामना म्यांमार के स्कैमर सेंटर से जुड़े खतरनाक अपराधियों से हो गया.
वहां, स्थानीय गाइड सहित ग्रुप के सभी 11 सदस्यों को 20,000 यूएसडीटी प्रति व्यक्ति की दर से बेच दिया गया, जो अमेरिकी डॉलर से जुड़ी एक प्रकार की क्रिप्टोकरेंसी है. इसके बाद उस तस्कर ने उन्हें थ्री पगोडा पास के पास स्थित पायथोंजू कस्बे में एक स्कैमिंग करने वाले गिरोह को बेच दिया.
यांग ने इस सीक्रेट साइबर स्कैमर अड्डे का नाम केके 2.0 बताया, जो म्यावाड्डी टाउनशिप में स्थित कुख्यात स्कैमर सेंटर है. पिछले साल म्यांमार के मिलिट्री शासन ने कहा था कि उन्होंने इस सेंटर पर छापा मारा था. लगभग 200 इमारतों पर कब्जा कर लिया था और यहां कैद 2,000 से अधिक श्रमिकों को रिहा कराया था.
यांग ने बताया कि चीन और थाईलैंड ने म्यांमार के साथ मिलकर इन स्कैमरों के अड्डों पर संयुक्त कार्रवाई भी शुरू की थी. यांग ने कहा कि इस खबर ने उन्हें यह भ्रम दिया कि थाईलैंड-म्यांमार सीमावर्ती क्षेत्र सुरक्षित है.
हालांकि, उन्हें यह देखकर आश्चर्य हुआ कि स्कैमरों के अड्डे तीनों पैगोडा में हर जगह थे. यांग ने कहा कि इस परिसर में प्रवेश करते ही उनके ग्रुप के लोगों को अनुशासन के तौर पर पीटा गया. 2002 में सेना में भर्ती हुए और पैदल सेना की ट्रेनिंग हासिल करने वाले पूर्व सैनिक यांग ने कहा कि उन्हें इस जगह पर टॉर्चर किया गया.
यांग के मुताबिक, स्कैमर अड्डे पर पहली शाम ही यांग ने कुछ ऐसा किया कि वहां का सरगना उससे प्रभावित हो गया. दरअसल, उसने स्थानीय गाइड को पीट-पीट कर अधमरा कर दिया. क्योंकि उसने हम सभी को धोखा देने के बाद नीचे वाले बिस्तर पर अपना दावा करने की हिम्मत की थी.उन्होंने कहा कि इससे उस अड्डे के प्रमुख प्रभावित हुए, जिन्होंने उन्हें बातचीत के लिए बुलाया. तब यांग को अपने घर फोन करने की परमिशन दी गई.
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यांग ने कहा कि उन्हें बताया गया था कि आमतौर पर केवल उन्हीं लोगों को महीने में एक बार फोन करने की अनुमति होती है जो एक साल से अधिक समय से काम कर रहे होते हैं. यांग ने पहले झूठ बोला कि उसके मोबाइल फोन की बैटरी खत्म हो रही है, और उसने उनकी केबल का इस्तेमाल करके बैटरी को 62 से 98 प्रतिशत तक चार्ज किया.
फिर उसने चीनी पुलिस को फोन किया. वह सीक्रेट अड्डे में बने होस्टल के पिछले हिस्से में गया, जहां गार्ड कभी-कभार ही गश्त लगाते थे. फिर उसने उस स्कैमिंग अड्डे की छह मीटर ऊंची दीवार के नीचे कुछ रेत की बोरियां और लकड़ी के तख्ते पड़े देखे.
एक ट्रेंड सैनिक होने के नाते, यांग दीवार पर चढ़ने और अपनी उंगलियों से दीवार के किनारे को पकड़ने में सक्षम हो गया. फिर वह दीवार फांदकर दूसरी तरफ चला गया. यांग ने कहा कि वह भाग्यशाली था क्योंकि दीवार पर लगे तार में बिजली नहीं दौड़ रही थी. दीवार के बगल में कोई दूसरा अड्डा नहीं था.
वह सिर्फ टैंक टॉप, शॉर्ट्स और क्रॉक्स पहने हुए उस जगह से भाग निकला. उसने मैप ऐप देखा और पाया कि वह सीमा से केवल 3 किलोमीटर दूर था.यांग ने बताया कि फिर भी मैं उस तरफ दौड़ नहीं सकता था. वहां पहरेदार थे और मुझे वापस अड्डे पर भेज दिया जाता.
खोजी कुत्तों से बचने के लिए शरीर पर लगाया गोबर
वह पहाड़ों की ओर भागा और घास में मिले गोबर को अपने ऊपर लगा लिया, ताकि अपनी गंध को छिपा सके और खोजी कुत्तों को चकमा दे सके. उन्होंने कहा कि वे इतने घबराए हुए और उत्साहित थे कि उन्हें उन कांटों का दर्द महसूस ही नहीं हुआ जिनसे वे गुजर रहे थे.
यांग ने बताया कि वह अगले दिन सुबह करीब 1 बजे सीमा के पास पहुंच चुके थे.उसने बताया कि सीमा पर एक हथियारबंद व्यक्ति पहरा दे रहा था. इसलिए वह सुबह 3 बजे तक छिपा रहा, लेकिन वह व्यक्ति नहीं गया. इसलिए उसने आसपास पड़ी एक मजबूत पुआल की रस्सी उठाई, पीछे से उस व्यक्ति के पास पहुंचा और उसे काबू में कर लिया.
वह अगले दिन सुबह तड़के थाईलैंड पहुंचा. यांग ने भागने के दौरान एक चैट ऐप पर अपने पूर्व साथी सैनिक और कई पुलिस अधिकारियों से बात की और हर घंटे एक बार फोन चेक किया.
थाईलैंड में रहते हुए भी वह सतर्क रहता था. दिन में छिपता था और रात में अपनी जान बचाने के लिए भागता था. थाईलैंड में चीनी दूतावास पहुंचने के बाद ही उन्हें राहत महसूस हुई. उन्होंने बताया कि दूतावास पहुंचने तक उनके फोन की बैटरी 17 प्रतिशत ही बची थी.
पासपोर्ट के दोबारा जारी होने तक आधा महीना इंतजार करने के बाद, वह चीन लौट गया. यांग ने अपनी ये कहानी सोशल मीडिया पर भी शेयर की है. अपने इस अनुभव के बारे में बात करते हुए, यांग ने कहा कि उन्हें अभी भी बुरे सपने आते हैं कि मैं पहाड़ों में दौड़ने का सपना देखता हूं और अंत में पसीने से तरबतर हो जाता हूं.
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